ई न बात हमरा बुझा सकल,काहे वासते ई बवाल बा

जे हवा उठल बिना बात के,ओहि बात के त मलाल बा

कबो छा गइल रहे रूप जे एह दिल मे अउर दिमाग में

उहे रूप बा अपरूप अब,ओकरे हमेशे खयाल बा

बोलते रहल सब लोग,बाकिर कान केहुओ ना दिहल

केहू कुछ कहल, केहू कुछ सुनल,त समाद के इहे हाल बा

देखियो के हम त चुपे रही,बाकी कबले ई चली सिलसिला

इहे सोच मन के सता रहल,ई त जिंदगी के सवाल बा

आके आखिर के पड़ाव पर बिसमाद से मन भर गइल

जे रिसत रहल,नखोरा गइल,इहे आज के अहवाल बा.