राम रहीम मोर्चे पर फेल ‘सरकार’

| द भोजपुरिया टीम, भोजपुरी खोज.काँम के खातिर

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम के सीबीआई अदालत द्वारा रेप के दोषी बनवला के बाद भइल आजगनी आ हिंसा में अब तक 30 लोगन के मौत हो चुकल बा जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हो गईलें.

लेकिन सवाल इहे उठ रहल बा कि का एह हिंसा के रोकल जा सकत रहे.

चाहें मामला डेरा सच्चा सौदा के होखे भ संत रामपाल या फिर जाट आरक्षण के बात होखे हर जगह सरकार भीड़ जुटे दिहलसि. हरियाणा के खट्टर सरकार हर तरह से बेबस आ लाचार ही दिखल.

जब सरकार के पता रहे कि भीड़ के जुटान होखे जा रहल बा तब सरकार के दावा के अनुसार धारा 144 लागू कर दिहल गइल रहे अइसे में सवाल उठावल जायज बा कि धारा 144 के बाद भी भीड़ के काहें जुटे दिहल गइल?

मामिला चाहे राजनीतिक होखे भा कुछ आउर हरियाणा सरकार हर मोर्चे पर फेल ही नज़र आइल. पहिले जाट आरक्षण में जाटन के नाराज ना कइला के सोच फिर राम रहीम मामले में डेरा वालन के नाराज ना कइला के सोच सरकार के रहे.

सरकार के जब पहिलही अनुमान लाग गइल रहे,लोगन के जुटान शुरू हो गइल रहल तब भीड़ के जुटान रोके के पर्याप्त इंतजाम होते हुए भी संसाधन के उचित प्रयोग ना कइल गइल आ लोगन के जुटे दिहल गइल.

चुकि पिछला विधानसभा चुनाव में डेरा द्वारा भाजपा के समर्थन कइल गइल रहे अइसे में अनुमान लगावे वाला इहो अनुमान लगा रहल बाड़ें कि हो सकेला की राज्य सरकार के नरमी ओहि के नतीजा होखे.

हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट राज्य सरकार के फटकार भी लगवलसि आ कोर्ट इहां तक भी टिप्पणी कइलसि की काहें ने पुलिस महानिदेशक के ही बर्खास्त कर दिहल जाव.

कवनो भी सरकार के पहिला कर्तव्य होला आम जनमानस के रक्षा कइल लेकिन खट्टर सरकार नाकाम साबित भइल.

पहिले संत रामपाल मामला होखे भ जाट आंदोलन सरकार एतना बढ़ घटना से भी कुछ ना सिख पवलसि. अगर जाट आंदोलन के ही बात कइल जाव त ओह समय हरियाणा सरकार के बेबसी ढेर नज़र आइल.

समय रहते अगर मामिला देखल गइल रहित त सायद ही पुलिस बल के अलावा और एजेंसियन के जरूरत पड़ल रहित. पुलिस के अलावा सीआरपीएफ आ सेना के भी बुलावे के पड़ल, कर्फ्यू लागल.

मोबाइल आ इंटरनेट सेवा भी बंद करे के पड़ल. एतना सब के बावजूद भी 30 लोगन के अपना जान से हाथ धोवे के पड़ल.

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